01टूल नहीं, फ़ैसले से शुरू करें
मल्टी-मार्केटप्लेस इंटीग्रेशन का उद्देश्य यह तय करना है कि हर फ़ील्ड का मालिक सिस्टम कौन है और टकराव, देरी व रीट्राई कैसे सँभले, सिर्फ़ गतिविधि दिखाना नहीं। भाग 3 में टीम डेटा कॉन्ट्रैक्ट से काम करती है और दर्ज करती है कि यह चुनाव इसी कैटलॉग के लिए क्यों उचित है। जाँच में सिस्टम मैप की तुलना मालिक के दिए तथ्यों, मौजूदा प्लेटफ़ॉर्म कंट्रोल और कमर्शियल बेसलाइन से होती है। इनमें एक भी न हो तो सुझाव अस्थायी रहेगा, निश्चितता की तरह नहीं बेचा जाएगा।
02कौन-सा प्रमाण स्कोप बदलता है
मल्टी-मार्केटप्लेस इंटीग्रेशन का उद्देश्य यह तय करना है कि हर फ़ील्ड का मालिक सिस्टम कौन है और टकराव, देरी व रीट्राई कैसे सँभले, सिर्फ़ गतिविधि दिखाना नहीं। भाग 4 में टीम सिंक और रीट्राई नियम से काम करती है और दर्ज करती है कि यह चुनाव इसी कैटलॉग के लिए क्यों उचित है। जाँच में सोर्स-ऑफ़-ट्रुथ मैट्रिक्स की तुलना मालिक के दिए तथ्यों, मौजूदा प्लेटफ़ॉर्म कंट्रोल और कमर्शियल बेसलाइन से होती है। इनमें एक भी न हो तो सुझाव अस्थायी रहेगा, निश्चितता की तरह नहीं बेचा जाएगा।
03पहला नियंत्रित बैच कैसे काम करता है
मल्टी-मार्केटप्लेस इंटीग्रेशन का उद्देश्य यह तय करना है कि हर फ़ील्ड का मालिक सिस्टम कौन है और टकराव, देरी व रीट्राई कैसे सँभले, सिर्फ़ गतिविधि दिखाना नहीं। भाग 5 में टीम रिकन्सिलिएशन रिपोर्ट से काम करती है और दर्ज करती है कि यह चुनाव इसी कैटलॉग के लिए क्यों उचित है। जाँच में डेटा कॉन्ट्रैक्ट की तुलना मालिक के दिए तथ्यों, मौजूदा प्लेटफ़ॉर्म कंट्रोल और कमर्शियल बेसलाइन से होती है। इनमें एक भी न हो तो सुझाव अस्थायी रहेगा, निश्चितता की तरह नहीं बेचा जाएगा।
04इकॉनॉमिक्स और ऑपरेशन कहाँ मिलते हैं
मल्टी-मार्केटप्लेस इंटीग्रेशन का उद्देश्य यह तय करना है कि हर फ़ील्ड का मालिक सिस्टम कौन है और टकराव, देरी व रीट्राई कैसे सँभले, सिर्फ़ गतिविधि दिखाना नहीं। भाग 6 में टीम कटओवर और रोलबैक योजना से काम करती है और दर्ज करती है कि यह चुनाव इसी कैटलॉग के लिए क्यों उचित है। जाँच में सिंक और रीट्राई नियम की तुलना मालिक के दिए तथ्यों, मौजूदा प्लेटफ़ॉर्म कंट्रोल और कमर्शियल बेसलाइन से होती है। इनमें एक भी न हो तो सुझाव अस्थायी रहेगा, निश्चितता की तरह नहीं बेचा जाएगा।
05स्वीकृति का अर्थ
मल्टी-मार्केटप्लेस इंटीग्रेशन का उद्देश्य यह तय करना है कि हर फ़ील्ड का मालिक सिस्टम कौन है और टकराव, देरी व रीट्राई कैसे सँभले, सिर्फ़ गतिविधि दिखाना नहीं। भाग 7 में टीम सिस्टम मैप से काम करती है और दर्ज करती है कि यह चुनाव इसी कैटलॉग के लिए क्यों उचित है। जाँच में रिकन्सिलिएशन रिपोर्ट की तुलना मालिक के दिए तथ्यों, मौजूदा प्लेटफ़ॉर्म कंट्रोल और कमर्शियल बेसलाइन से होती है। इनमें एक भी न हो तो सुझाव अस्थायी रहेगा, निश्चितता की तरह नहीं बेचा जाएगा।
06वादा कहाँ समाप्त होता है
मल्टी-मार्केटप्लेस इंटीग्रेशन का उद्देश्य यह तय करना है कि हर फ़ील्ड का मालिक सिस्टम कौन है और टकराव, देरी व रीट्राई कैसे सँभले, सिर्फ़ गतिविधि दिखाना नहीं। भाग 8 में टीम सोर्स-ऑफ़-ट्रुथ मैट्रिक्स से काम करती है और दर्ज करती है कि यह चुनाव इसी कैटलॉग के लिए क्यों उचित है। जाँच में कटओवर और रोलबैक योजना की तुलना मालिक के दिए तथ्यों, मौजूदा प्लेटफ़ॉर्म कंट्रोल और कमर्शियल बेसलाइन से होती है। इनमें एक भी न हो तो सुझाव अस्थायी रहेगा, निश्चितता की तरह नहीं बेचा जाएगा। इंटीग्रेशन स्कोप दस्तावेज़ित इंटरफ़ेस, रेट लिमिट और मालिक के उपलब्ध परमिशन तक सीमित है।